RIP क्या है? || Routing Information Protocol

राउटिंग सूचना प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol, RIP) एक प्रमुख और पुराना रूटिंग प्रोटोकॉल है जो TCP/IP नेटवर्क्स में रूटिंग तालिकाओं की जानकारी संग्रहित करता है। यह जानकारी रूटरों के बीच शेयर की जाती है ताकि उन्हें नेटवर्क के सभी संबंधित नोड्स और नेटवर्क्स की जानकारी मिल सके। RIP एक डिस्टेंस वेक्टर प्रोटोकॉल है, जिसका मतलब है कि यह रूटिंग मेट्रिक के आधार पर रूटिंग निर्णय लेता है।

RIP का मुख्य लक्ष्य रूटिंग तालिकाओं को स्थायी रूप से अपडेट करना है, ताकि यह नेटवर्क में विश्वसनीय और सही पथों का पता लगा सके। इसके लिए, हर कुछ समय-समय पर, RIP रूटिंग तालिकाओं को अपडेट करने के लिए रूटरों के बीच सूचना भेजता है।

हालांकि, RIP की प्रमुख सीमाएं हैं, जैसे कि हर। सीमाओं का समापन नहीं हो सकता है और बड़े नेटवर्क्स में उपयोग करने के लिए अधिक विकेंद्रीकरण की आवश्यकता होती है। RIP का उपयोग आजकल अधिकांश छोटे नेटवर्क्सों में होता है, जहां यह साधारण, साधारण, और सस्ता हल प्रदान करता है।

Routing Information Protocol किस प्रकार का प्रोटोकॉल है?

रूटिंग इन्फॉर्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol) एक डाइनामिक रूटिंग प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क के रूटिंग टेबल को अपडेट करने के लिए इस्तेमाल होता है। यह प्रोटोकॉल छोटे से छोटे नेटवर्कों के लिए बनाया गया था और उन्हें अपडेट करने के लिए समय-समय पर पैकेट्स भेजता है। RIP का उपयोग अधिकतम 15 हॉप्स (hop) तक करने के लिए दर्जी किया गया है, जिससे इसकी प्रतिफलिति सीमित हो जाती है।

RIP नेटवर्क में सम्मिलित डेवाइसों के बीच सूचना बाटने के लिए उपयोग किया जाता है ताकि वे नेटवर्क के लिए सही रूटिंग पथ का चयन कर सकें। यह अद्यतन नेटवर्क के लिए रूटिंग टेबल को बनाए रखने में मदद करता है ताकि डेटा पैकेट्स सही रूट पर निर्देशित हो सकें। RIP के द्वारा नेटवर्क टॉपोलॉजी के अपडेट का समय बचाया जा सकता है और नेटवर्क की प्रतिफलिति और स्थिरता बढ़ाई जा सकती है।

RIP का मुख्य उद्देश्य क्या है?

रूटिंग सूचना प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) का मुख्य उद्देश्य एक नेटवर्क में रूटिंग टेबल को अपडेट करना है ताकि डेटा पैकेट को ठीक से मार्गदर्शन किया जा सके। यह एक डायनामिक रूटिंग प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क में उपलब्ध रूटिंग इनफॉर्मेशन को साझा करता है और नेटवर्क के विभिन्न रूटरों के बीच रूटिंग टेबल को अपडेट करता है।

RIP एक distance-vector प्रोटोकॉल है, जिसमें हर रूटर अपने पड़ोसी रूटरों से दूरी की जानकारी अद्यतन करता है और सबसे कम होप्स (hops) का पथ चुनता है। यह उद्देश्य है कि डेटा पैकेट को उपयुक्त मार्गदर्शन प्राप्त हो, ताकि वह सही विषयक निर्देशिका (destination) तक पहुंच सके। RIP का उद्देश्य है नेटवर्क के लिए एक सरल और स्वचालित रूटिंग प्रोसेस को प्रदान करना, जो नेटवर्क के बदलते टोपोलॉजी को सहजता से संगठित कर सके और सही डेटा पैकेट की पहुंच को सुनिश्चित कर सके।

Routing Information Protocol किस लेयर पर काम करता है?

रूटिंग इनफॉर्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) एक लोकल एयरिया नेटवर्क (LAN) पर काम करने वाला प्रोटोकॉल है जो डेटा पैकेटों के मार्ग को निर्धारित करने में सहायक होता है। यह पहले और दूसरे लेयर के बीच काम करता है, जिसे नेटवर्क लेयर (Network Layer) या लेयर 3 कहा जाता है।

RIP का मुख्य उद्देश्य है रूटिंग टेबल में अपडेट रखना और नेटवर्क के विभिन्न राउटरों के बीच स्थिति की जानकारी साझा करना। जब कोई राउटर RIP का उपयोग करता है, तो यह अपने पड़ोसी राउटरों से रूटिंग टेबल की जानकारी प्राप्त करता है और अपने पास इस जानकारी को अपडेट करता रहता है।

RIP एक आसानी से कॉन्फ़िगर किया जा सकने वाला और इस्तेमाल किया जाने वाला प्रोटोकॉल है, जिसका उपयोग छोटे नेटवर्कों में किया जाता है। इसके लेयर 3 पर काम करने के कारण, यह नेटवर्क के लिए रूटिंग और फॉरवर्डिंग के लिए जिम्मेदार होता है और यह संचार की गति और सुगमता को सुनिश्चित करता है।

Routing Information Protocol किस तरह का रूटिंग प्रोटोकॉल है, डायनामिक या स्टेटिक?

राउटिंग इनफार्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) एक डायनामिक रूटिंग प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क में रूटिंग टेबल की जानकारी को अपडेट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह रूटिंग इनफार्मेशन को अन्य राउटरों के साथ साझा करता है ताकि नेटवर्क में डेटा पैकेट्स को सही रूट पर पहुंचाया जा सके।

RIP का मुख्य उद्देश्य नेटवर्क की टॉपोलॉजी और डेटा पथ को अद्यतन रखना है। यह रूटिंग टेबल में बदलाव को निर्धारित अंतराल पर भेजकर अन्य राउटरों को अपडेट करता है। RIP नेटवर्क में बदलाव को ट्रैक करने के लिए हर 30 सेकंड में एक अपडेट भेजता है।

इसका प्रयोग सबसे अधिक स्मॉल नेटवर्क्स में किया जाता है क्योंकि इसमें कम बैंडविड्थ का उपयोग होता है और यह आसानी से सेटअप किया जा सकता है। लेकिन बड़े नेटवर्क्स के लिए RIP का उपयोग अधिकांशत: अवांछनीय होता है क्योंकि इसमें अधिक वक्तावली और अधिक उत्तरदाताओं की मांग होती है जो इसे अधिक विलम्बित बना सकता है।

RIP में इस्तेमाल होने वाले मैट्रिक क्या है?

राउटिंग सूचना प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol, RIP) एक दूरसंचार प्रोटोकॉल है जो कंप्यूटर नेटवर्क्स में राउटिंग को प्रबंधित करने के लिए उपयोग किया जाता है। RIP में मैट्रिक को ‘हॉप्स’ (Hops) के रूप में मापा जाता है। हॉप्स का मतलब है कि एक पैकेट या सूचना पैकेट कितने राउटरों (या हॉप्स) के माध्यम से जाता है।

RIP में मैट्रिक को 16-बिट के बारे में जाना जाता है, जिसे हॉप्स के रूप में मापा जाता है। यहां, जितने अधिक हॉप्स, उतना अधिक मैट्रिक होता है, जिसका मतलब है कि राउटर की दूरी या पथ का लंबाई अधिक है। RIP में, अगर मैट्रिक का मान 15 हो जाता है, तो यह स्थिति अज्ञात का संकेत देता है, अर्थात राउट का नामलेस होने की स्थिति होती है।

अक्सर RIP में इस्तेमाल होने वाली मैट्रिक को ‘हॉप्स काउंट’ भी कहा जाता है, और यह नेटवर्क ट्राफिक के लिए प्रमुख निर्णायक होती है, जिससे ट्राफिक को सही दिशा में रखने के लिए सही पथ का चयन किया जा सकता है।

Routing Information Protocol के कितने वर्जन्स हैं?

रूटिंग सूचना प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol) एक पुराना और प्रमुख रूप से उपयोग किया जाने वाला नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो आवश्यक नेटवर्क सूचना को बुनियादी रूप से प्रसारित करने के लिए उपयोग किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के कई विभिन्न संस्करण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं RIP Version 1 और RIP Version 2।

RIP Version 1 पहला संस्करण है, जो एक समय-में-समय-पर (periodically) नेटवर्क सूचना ब्रॉडकास्ट करता है ताकि अन्य रूटर्स नेटवर्क टोपोलॉजी को समझ सकें। RIP Version 2 में, कई महत्वपूर्ण नए विशेषताएं शामिल की गई हैं, जैसे वीआईपी (VLSM) समर्थन, एक्सटरनल (External) मेट्रिक्स का समर्थन, और मल्टीकास्ट समर्थन।

कुल मिलाकर, RIP के दो वर्जन हैं, जो नेटवर्क ट्रैफिक को प्रसारित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। हालांकि, RIP की सीमित स्थानीय (hop count) और साधारण वर्जनिंग सुरक्षा की वजह से, यह अब अधिक बड़े नेटवर्कों के लिए अधिक उपयुक्त नहीं है।

RIP की प्रतियोगिता कौन-कौन से रूटिंग प्रोटोकॉल्स से होती है?

रूटिंग इनफार्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) किसी नेटवर्क में रूटिंग टेबल को अपडेट करने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रोटोकॉल है। इस प्रोटोकॉल की प्रतियोगिता कई अन्य रूटिंग प्रोटोकॉल्स के साथ होती है। इनमें से कुछ प्रमुख प्रोटोकॉल हैं:

  1. OSPF (Open Shortest Path First): यह एक खुला रूटिंग प्रोटोकॉल है जो डाइनामिक रूप से नेटवर्क में सर्वोत्तम पथ को खोजता है।
  2. EIGRP (Enhanced Interior Gateway Routing Protocol): यह भी एक डाइनामिक रूटिंग प्रोटोकॉल है जो सर्वोत्तम पथ को खोजने के लिए मेट्रिक्स का उपयोग करता है।
  3. BGP (Border Gateway Protocol): यह इंटरनेट गेटवे रूटिंग प्रोटोकॉल है जो अलग-अलग आईपी नेटवर्कों के बीच संचार को प्रबंधित करता है।
  4. ISIS (Intermediate System to Intermediate System): यह भी एक रूटिंग प्रोटोकॉल है जो लार्ज स्केल नेटवर्क्स में उपयोग किया जाता है।

ये सभी प्रोटोकॉल अपने तरीके से रूटिंग इनफार्मेशन को बाँटते हैं और नेटवर्क के लिए सर्वोत्तम पथ का चयन करते हैं। RIP भी इसी प्रकार का प्रोटोकॉल है जो अपने मेट्रिक्स के आधार पर रूटिंग डिसीजन लेता है।

Routing Information Protocol के प्रमुख फायदे क्या हैं?

Routing Information Protocol (RIP) का मुख्य लाभ यह है कि यह एक आसानी से सेटअप किया जा सकने वाला और स्थापित प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क के लिए रूटिंग की सेटिंग प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, RIP एक लोगों को उपयुक्त समय में सभी अपडेट को प्राप्त करने की अनुमति देता है, जो नेटवर्क की प्रदर्शन क्षमता को बेहतर बनाता है।

इस प्रोटोकॉल का एक और लाभ यह है कि यह स्वतः ही बेदर्द पथ को छोड़कर सर्वश्रेष्ठ पथ का चयन करता है, जिससे नेटवर्क के लिए समय और बैंडविड्थ की बचत होती है। RIP छोटे नेटवर्कों के लिए अधिक उपयुक्त है, क्योंकि इसमें ज्यादा संख्या में रूटिंग टेबल का प्रबंधन नहीं करना पड़ता है और यह आसानी से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, RIP का मुख्य लाभ यह है कि यह नेटवर्क के लिए स्वचालित रूप से संग्रहित जानकारी के माध्यम से संचालन को सरल और सहज बनाता है।

Routing Information Protocol के प्रमुख नुकसान क्या हैं?

Routing Information Protocol (RIP) एक अत्यधिक प्रयोग किया जाने वाला रूटिंग प्रोटोकॉल है जो किसी नेटवर्क में रूटिंग टेबल की जानकारी संचार करता है। इसके प्रमुख नुकसान निम्नलिखित हैं:

  1. समय-समय पर अपडेट करने की अवधि: RIP निरंतर रूटिंग टेबल को अपडेट करता है, लेकिन इसका समय-समय पर अपडेट करने का कार्य काफी समय लेता है। यह समय लगाने में देरी का कारण बन सकता है और नेटवर्क के लिए अनुकूल नहीं होता है।
  2. मेट्रिक्स की सीमा: RIP में उपयोग किए जाने वाले हॉप्स की सीमा 15 होती है। यह मान्य हॉप्स की सीमा अधिकतम 15 होने के कारण बड़े नेटवर्क के लिए अप्रभावी हो सकता है।
  3. लूप के संभावना: RIP में पैदल गति और नेटवर्क की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण लूप की संभावना हो सकती है। यह नेटवर्क की प्रदर्शन को कम कर सकता है और नेटवर्क को अस्थिर बना सकता है।
  4. सुरक्षा संबंधी समस्याएं: RIP पासवर्ड की गुंजाइश नहीं करता है, जिससे यह सुरक्षा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। अगर कोई अनधिकृत उपयोगकर्ता RIP कॉन्फ़िगरेशन में हस्ताक्षर कर लेता है, तो वह नेटवर्क की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

इन नुकसानों के कारण, ध्यान देने वाले विनियमकों को RIP का उपयोग करते समय ध्यान में रखना आवश्यक है।

Routing Information Protocol का अध्ययन किस कंपनी ने किया था?

Routing Information Protocol (RIP) का अध्ययन Xerox Corporation ने किया था। यह प्रोटोकॉल पहले 1982 में Xerox के अनुसंधानकर्ता Charles Hedrick और David Mills द्वारा विकसित किया गया था। RIP एक लोकप्रिय और साधारण दूरसंचार प्रोटोकॉल है जो लोकल नेटवर्क्स में रूटिंग के लिए उपयोग किया जाता है।

यह एक डायनामिक रूप से अद्यतन होने वाला रूटिंग प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क की टॉपोलॉजी के बदलावों को स्वचालित रूप से स्थापित करता है। RIP के प्रमुख लक्ष्यों में रूटिंग टेबल को अपडेट करना, रूटिंग लूप्स को रोकना और संदेशों के प्रसार के लिए शॉर्ट होप काउंट को बढ़ावा देना शामिल है। RIP एक उदाहरण है जो बीच-बीच में रूटिंग प्रोटोकॉल्स के प्रमुख समूह में शामिल होता है जिन्हें अंतरनिर्देशक प्रोटोकॉल (IGP) कहा जाता है।

RIP इम्प्लीमेंटेशन के लिए कौन-कौन सी डिवाइस समर्थित होती हैं?

रूटिंग इनफॉर्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) को इम्प्लीमेंट करने के लिए कई डिवाइस उपयुक्त होते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख डिवाइस निम्नलिखित हैं:

  1. राउटर: राउटर RIP प्रोटोकॉल को समर्थन करते हैं और नेटवर्क के बीच रूटिंग की गणना करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  2. लेयर 3 स्विच: कुछ लेयर 3 स्विच RIP को समर्थन करते हैं और इंटर-व्यू रूटिंग की सेटिंग को प्रदान करते हैं।
  3. कंप्यूटर: कंप्यूटर सिस्टमों को राउटिंग करने के लिए RIP प्रोटोकॉल का उपयोग किया जा सकता है।

यह डिवाइस RIP प्रोटोकॉल का उपयोग करके रूटिंग तालिकाओं को समय-समय पर अपडेट करते हैं और नेटवर्क में संचार को सुनिश्चित करते हैं। RIP की सरलता और सामान्य लागत के कारण, यह छोटे से मध्यम आकार के नेटवर्कों के लिए आदर्श है। लेकिन बड़े नेटवर्कों के लिए, जिनमें अधिक नॉड्स होते हैं, इसका उपयोग कम किया जा सकता है और प्रदर्शन पर प्रभाव डाल सकता है।

RIP को किस प्रकार की नॉलेज से जोड़ा गया था?

राउटिंग इनफॉर्मेशन प्रोटोकॉल (Routing Information Protocol – RIP) एक लोकप्रिय डायनामिक रूप से रूटिंग प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क में डेटा को पहुंचाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे ARPANET (एर्पानेट) नेटवर्क के लिए बनाया गया था, जो कि इंटरनेट का पूर्ववर्ती रूप था।

राउटिंग इनफॉर्मेशन प्रोटोकॉल (RIP) का विकास 1970 के दशक में Xerox Corporation के सॉर्डी (SRI) के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किया गया था। यह उनकी आवश्यकताओं को समझकर डिज़ाइन किया गया था, जिनमें नेटवर्क के बदलते तत्वों के लिए स्वचालित नेटवर्क मैपिंग की आवश्यकता थी।

इस प्रोटोकॉल को बनाते समय, अनुसंधानकर्ताओं ने नेटवर्क ट्रैफ़िक और नेटवर्क की विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखा। इससे इसे डायनामिक रूप से संबंधित नेटवर्कों के लिए एक प्रभावी और सहज तरीके से उपयोग किया जा सकता है। राउटिंग इनफॉर्मेशन प्रोटोकॉल (RIP) ने नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी इसका उपयोग किया जाता है।

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