Sasser Virus क्या है? || लक्षण क्या होते हैं?

Sasser Virus एक कंप्यूटर वर्म है जो मई 2004 में व्यापक रूप से फैल गया था। इसे जर्मन छात्र स्वेन जस्चान द्वारा बनाया गया था। यह वायरस Microsoft Windows के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक सुरक्षा कमजोरी का फायदा उठाता है। खासकर Windows XP और Windows 2000 को निशाना बनाता है। सभी वर्म की तरह, सासर खुद को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में स्वचालित रूप से फैलाता है। यह वायरस इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों को संक्रमित करता है, बिना किसी उपयोगकर्ता की कार्रवाई के। सासर वायरस संक्रमित कंप्यूटर को बार-बार बंद करने और पुनरारंभ करने का कारण बनता है, जिससे वह कंप्यूटर अनुपयोगी हो जाता है।

सासर वायरस ने सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, और बड़े-बड़े व्यवसायों को भी प्रभावित किया, जिससे व्यापक पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ। इस वायरस का प्रसार रोकने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने जल्दी से एक पैच जारी किया, लेकिन तब तक इसने दुनिया भर में कई सिस्टम्स को संक्रमित कर दिया था।

स्वेन जस्चान को इस वायरस के निर्माण और फैलाव के लिए गिरफ्तार किया गया और बाद में उसे दोषी ठहराया गया। सासर वायरस ने साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्णता और सिस्टम को अपडेट और पैच करने की आवश्यकता को उजागर किया।

Sasser Virus का नाम क्यों “Sasser” है?

Sasser Virus का नाम “Sasser” इसलिए रखा गया है क्योंकि इसे बनाने वाले ने इसे “Lsass.exe” नामक विंडोज़ प्रोसेस को निशाना बनाकर डिज़ाइन किया था। Lsass.exe (Local Security Authority Subsystem Service) एक महत्वपूर्ण सिस्टम प्रोसेस है जो विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में सुरक्षा नीतियों को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार होता है। इस वायरस ने Lsass.exe में पाई गई एक कमजोरी का फायदा उठाकर खुद को फैलाया और सिस्टम को प्रभावित किया।

2004 में सर्जन में आया यह वायरस विशेष रूप से विंडोज़ 2000 और विंडोज़ XP ऑपरेटिंग सिस्टम्स को प्रभावित करता था। इसका निर्माण एक जर्मन कंप्यूटर साइंस के छात्र, स्वेन जशान, ने किया था। जब यह वायरस एक सिस्टम में प्रवेश करता था, तो यह इंटरनेट पर दूसरे कंप्यूटरों को स्कैन करना शुरू कर देता था ताकि वे भी इस वायरस से संक्रमित हो सकें।

इस प्रकार के स्वचालित फैलाव और इसके द्वारा उपयोग की गई सुरक्षा कमजोरी के कारण इस वायरस को “Sasser” नाम दिया गया, जो सीधे तौर पर Lsass.exe प्रोसेस के नाम से जुड़ा हुआ है। यह नाम वायरस के मूल प्रकृति और उसके संचालन के तरीके को प्रतिबिंबित करता है।

Sasser Virus कैसे प्रसारित होता है?

Sasser वायरस का प्रसारण एक नेटवर्क-आधारित वर्म के रूप में होता है, जिसका अर्थ है कि यह इंटरनेट या लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) के माध्यम से फैलता है। यह वायरस माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ के LSASS (Local Security Authority Subsystem Service) में मौजूद एक सुरक्षा खामी का उपयोग करता है।

जब एक कंप्यूटर इस वर्म से संक्रमित हो जाता है, तो यह अपने आप ही इंटरनेट स्कैन करने लगता है और अन्य कमजोर कंप्यूटरों की खोज करता है। एक बार जब यह एक नया कमजोर सिस्टम पा लेता है, तो वह उस सिस्टम में स्वयं को भेज देता है और इसे भी संक्रमित कर देता है। इसके बाद, नए संक्रमित कंप्यूटर भी इसी प्रक्रिया को दोहराते हैं, जिससे वायरस बहुत तेजी से फैलता है।

Sasser वायरस के प्रभाव से प्रभावित कंप्यूटर अक्सर स्वतः ही रिस्टार्ट हो जाते हैं या सिस्टम क्रैश हो जाता है, जिससे यूज़र्स के लिए महत्वपूर्ण डेटा खोने और काम में बाधा उत्पन्न होती है। इसे रोकने के लिए सुरक्षा पैच इंस्टॉल करना और अद्यतित एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

“Sasser Virus” किस तरह कार्य करता है?

यह वायरस विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम पर हमला करता था और विशेषकर उन मशीनों को निशाना बनाता था जिनमें विंडोज़ XP और विंडोज़ 2000 इंस्टॉल था। सासेर वायरस की प्रमुख विशेषता यह थी कि यह उपयोगकर्ता की किसी भी कार्रवाई के बिना, नेटवर्क के माध्यम से स्वयं को फैलाने में सक्षम था।

सासेर वायरस LSASS (Local Security Authority Subsystem Service) नामक विंडोज़ सेवा में एक खामी का फायदा उठाकर सिस्टम में प्रवेश करता था। यह खामी MS04-011 सुरक्षा पैच से संबंधित थी। एक बार सिस्टम में प्रवेश करने के बाद, वायरस सिस्टम को रिबूट कर देता था और नेटवर्क के अन्य कंप्यूटरों को स्कैन कर उसी खामी का उपयोग करके उन्हें भी संक्रमित कर देता था।

यह वायरस संक्रमित कंप्यूटरों को धीमा कर देता था और उन्हें बार-बार रिबूट करने पर मजबूर कर देता था। सासेर वायरस का फैलाव तेज़ी से हुआ और इसने लाखों कंप्यूटरों को प्रभावित किया। इसके कारण व्यक्तिगत और व्यावसायिक डेटा को काफी नुकसान हुआ। माइक्रोसॉफ्ट ने इस वायरस से निपटने के लिए जल्दी ही सुरक्षा अपडेट जारी किए और उपयोगकर्ताओं को अपने सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इन अपडेट्स को इंस्टॉल करने की सलाह दी।

Sasser Virus के प्रभाव क्या होते हैं?

इस वायरस के कई गंभीर प्रभाव थे:

कंप्यूटर की गति धीमी करना: सासर वायरस से संक्रमित कंप्यूटर की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। यह वायरस सिस्टम की मेमोरी और प्रोसेसिंग पावर का अत्यधिक उपयोग करता है, जिससे कंप्यूटर की गति बहुत धीमी हो जाती है।

सिस्टम क्रैश: इस वायरस के कारण कई बार कंप्यूटर अचानक बंद हो जाता है या बार-बार रिबूट होता है। इससे उपयोगकर्ता अपने काम को सुरक्षित नहीं रख पाते और डेटा लॉस का सामना करना पड़ता है।

नेटवर्क ट्रैफिक में वृद्धि: सासर वायरस खुद को नेटवर्क के माध्यम से फैलाने की कोशिश करता है, जिससे नेटवर्क ट्रैफिक में भारी वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप, नेटवर्क की स्पीड और परफॉरमेंस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सुरक्षा जोखिम: यह वायरस विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाता है, जिससे सिस्टम की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। इससे अन्य मालवेयर और वायरस के लिए भी रास्ता खुल जाता है।

बिजनेस में नुकसान: कई बड़े संगठनों और संस्थानों को इस वायरस के कारण गंभीर आर्थिक नुकसान हुआ। वर्कफ्लो में रुकावट और डेटा की हानि ने बिजनेस संचालन को प्रभावित किया।

सासर वायरस ने यह साबित किया कि कंप्यूटर सुरक्षा की अनदेखी कितनी महंगी पड़ सकती है और साइबर सुरक्षा के महत्व को और भी स्पष्ट कर दिया।

“Sasser Virus” के उत्पादक कौन थे?

“Sasser वायरस” एक कंप्यूटर वर्म (worm) था जिसे 2004 में पहली बार देखा गया था। इस वायरस का उत्पादक एक जर्मन छात्र था जिसका नाम स्वेन जस्चन (Sven Jaschan) था। उस समय स्वेन जस्चन मात्र 18 वर्ष का था और वह अपने माता-पिता के साथ जर्मनी के लोवेस (Lohne) शहर में रहता था।

स्वेन ने Sasser वायरस को एक प्रकार के प्रयोग के रूप में विकसित किया था, लेकिन यह वायरस तेजी से फैल गया और इसने दुनिया भर में कई कंप्यूटर सिस्टम को प्रभावित किया। Sasser वायरस ने विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के एक सुरक्षा खामी का फायदा उठाया और संक्रमित कंप्यूटरों को धीमा कर दिया और कभी-कभी उन्हें पुनःआरंभ करने के लिए मजबूर कर दिया।

Sasser वायरस के कारण बहुत से बैंकों, अस्पतालों, और महत्वपूर्ण संस्थानों के नेटवर्क प्रभावित हुए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। स्वेन जस्चन को अंततः गिरफ्तार किया गया और उसने अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया। उसे एक निलंबित सजा दी गई और उसे कंप्यूटर उपयोग से संबंधित गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया।

इस घटना ने साइबर सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर उजागर किया और यह दिखाया कि एक अकेला व्यक्ति भी विश्वभर में कितनी बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकता है।

क्या “Sasser Virus” ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रभावित करता है?

सैसर वायरस (Sasser Virus) एक कंप्यूटर वर्म था जिसने 2004 में बड़ी संख्या में विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम (Windows Operating System) को प्रभावित किया था। यह वायरस विशेष रूप से विंडोज़ 2000 और विंडोज़ XP ऑपरेटिंग सिस्टम्स को निशाना बनाता था। सैसर वायरस की विशेषता थी कि इसे फैलने के लिए किसी उपयोगकर्ता की सहायता की आवश्यकता नहीं होती थी; यह स्वचालित रूप से इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटरों में फैलता था।

सैसर वायरस विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में LSASS (Local Security Authority Subsystem Service) में मौजूद एक भेद्यता का लाभ उठाता था। यह भेद्यता वायरस को अनुमति देती थी कि वह नेटवर्क के माध्यम से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में प्रवेश कर सके। एक बार जब वायरस किसी सिस्टम में प्रवेश कर जाता था, तो यह सिस्टम को बार-बार रीबूट करने के लिए मजबूर करता था, जिससे कंप्यूटर का उपयोग करना मुश्किल हो जाता था और कई बार सिस्टम पूरी तरह से ठप हो जाता था।

इस वायरस का प्रभाव इतना व्यापक था कि इसे व्यक्तिगत कंप्यूटरों के अलावा कई व्यवसायिक नेटवर्क्स और सरकारी एजेंसियों के सिस्टम्स में भी समस्याएँ उत्पन्न कीं। इसने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप नेटवर्क डाउनटाइम और आर्थिक हानि हुई।

इस वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने सुरक्षा पैच जारी किया और उपयोगकर्ताओं को अपने सिस्टम्स को अपडेट करने की सलाह दी। सैसर वायरस ने एक बार फिर से साइबर सुरक्षा के महत्व और नियमित रूप से सिस्टम अपडेट्स और पैचिंग की आवश्यकता को उजागर किया।

“Sasser Virus” के लक्षण क्या होते हैं?

Sasser वायरस एक वर्म (worm) है जो पहली बार 2004 में देखा गया था। यह वायरस Windows ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रभावित करता है और नेटवर्क के माध्यम से तेजी से फैलता है। इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

सिस्टम का धीमा हो जाना: Sasser वायरस संक्रमित कंप्यूटर को अत्यंत धीमा कर देता है। उपयोगकर्ता को सामान्य काम करने में कठिनाई होती है।

बार-बार रिबूट होना: संक्रमित कंप्यूटर बार-बार अपने आप रिबूट (reboot) होने लगता है। यह बिना किसी पूर्व चेतावनी के होता है और काम में रुकावट डालता है।

एरर मैसेज: अक्सर स्क्रीन पर एरर मैसेज दिख सकते हैं, जैसे कि “LSASS.EXE has encountered a problem and needs to close”। यह मैसेज वर्म के क्रियाकलाप का परिणाम होते हैं।

नेटवर्क ट्रैफिक में वृद्धि: Sasser वर्म नेटवर्क पर अत्यधिक ट्रैफिक पैदा करता है, जिससे नेटवर्क की गति धीमी हो जाती है। यह वायरस खुद को विभिन्न नेटवर्क उपकरणों में फैलाने की कोशिश करता है।

सुरक्षा सेटिंग्स में बदलाव: वायरस सिस्टम की सुरक्षा सेटिंग्स को बदल सकता है, जिससे अन्य मालवेयर का हमला और भी आसान हो जाता है।

अन्य अज्ञात समस्याएँ: संक्रमित सिस्टम में अन्य असामान्य गतिविधियाँ भी हो सकती हैं, जैसे कि फाइलें गायब होना या अनुप्रयोगों का ठीक से काम न करना। Sasser वायरस से बचाव के लिए एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखना और ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए नवीनतम सुरक्षा पैच इंस्टॉल करना आवश्यक है।

Sasser Virus को कैसे पहचाना जा सकता है?

Sasser वायरस को पहचानना एक कठिन प्रक्रिया हो सकती है क्योंकि यह वायरस एक क्रियाशील रूप से इन्टरनेट के माध्यम से फैल सकता है और सिस्टम की सुरक्षा को उलझा सकता है। यह वायरस Windows ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न संस्करणों पर प्रभाव डाल सकता है। Sasser की पहचान की प्रमुख संकेत हो सकती हैं:

सिस्टम धीमा हो जाना: Sasser वायरस एक सिस्टम को स्लो और असामान्य बना सकता है, क्योंकि यह अधिक रिसोर्सेस का उपयोग कर सकता है।

अस्वीकृत नेटवर्क ट्रैफिक: सिस्टम पर Sasser की उपस्थिति एक अस्वीकृत नेटवर्क ट्रैफिक उत्पन्न कर सकती है, जिससे नेटवर्क की गति प्रभावित हो सकती है।

अनियंत्रित रीस्टार्ट: Sasser वायरस के प्रभाव के कारण, सिस्टम अनियंत्रित रीस्टार्ट हो सकता है, जो कंप्यूटर के संचालन में असुविधा पैदा कर सकता है।

अनुपातिक डिस्क एक्सेस: Sasser वायरस के कारण अनुपातिक डिस्क एक्सेस हो सकता है, जो डेटा लॉस या अन्य सिस्टम संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है।

यदि किसी कंप्यूटर में ये संकेत पाए जाते हैं, तो सुझाव दिया जाता है कि उपयुक्त सुरक्षा के नियमानुसार कार्रवाई की जाए, जैसे कि एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग और सिस्टम को इंटरनेट से अलग रखना।

“Sasser Virus” के खिलाफ कैसे सुरक्षा उपाय लिए जा सकते हैं?

“Sasser वायरस” के खिलाफ सुरक्षा उपाय लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। पहले तो, सबसे महत्वपूर्ण है कि सिस्टम पर एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर को अद्यतन रखा जाए और नियमित रूप से स्कैन किया जाए। यह वायरस की पहचान करके उसे हटाने में मदद कर सकता है।

दूसरे, सुनिश्चित करें कि Windows ऑपरेटिंग सिस्टम और उसके सभी पैच और अपडेट्स समय पर लागू किए गए हों। व्यवसायिक संबंधों में, एक अच्छी नेटवर्क सुरक्षा नीति अनुकरण करना भी महत्वपूर्ण होता है, जिसमें फायरवॉल का उपयोग, अद्वितीय पासवर्ड प्रणाली और अधिक सुरक्षा उपकरण शामिल हों।

इसके अलावा, सतर्कता बढ़ाना भी अहम है। फिशिंग या सामाजिक इंजनियरिंग के माध्यम से वायरस को फैलाने की कोशिश को पहचानने और इससे बचने के लिए अधिकारिक होना चाहिए।

इन सभी सुरक्षा उपायों को समय-समय पर निरीक्षित और अपडेट किया जाना चाहिए ताकि किसी भी वायरस के खिलाफ तत्परता बनी रहे और सिस्टमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

क्या “Sasser Virus” को रोका जा सकता था?

“Sasser Virus” को रोकना संभव था अगर सुरक्षा संदेशों का पालन किया जाता और सिस्टम के लिए उपयुक्त पैच इंस्टॉल किया जाता। माइक्रोसॉफ्ट ने इसके लिए सुरक्षा पैच जारी किये थे जिन्हें सिस्टम पर लगाने से वायरस का प्रभाव कम हो सकता था। इसके अलावा, वायरस संकलन से बचने के लिए अच्छी ऑनलाइन सुरक्षा की अनुमति देनी चाहिए थी और प्रतिदिन कंप्यूटर को स्कैन करना चाहिए था।

इस प्रकार, सुरक्षित साइबर सुरक्षा कार्यक्रम और सुरक्षा संदेशों का पालन करके “Sasser Virus” की संभावना को कम किया जा सकता था। वायरसों के खिलाफ यह प्रतिक्रियाशील उपाय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करता है और ऑनलाइन स्थितियों में सुरक्षित रहने में मदद कर सकता है।

Sasser Virus के प्रसार के पीछे क्या मोटिवेशन था?

Sasser वायरस का प्रसार 2004 में हुआ था और इसका मुख्य मोटिवेशन था विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के एक विशेष सुरक्षा गड़बड़ी का उपयोग करके कंप्यूटरों में प्रवेश करना। यह वायरस वर्ड प्रोसेसर के एक vulnerability का उपयोग करता था, जिसके कारण वह ऑनलाइन कनेक्शन के माध्यम से बिना उपयोगकर्ता के स्वीकृति के कंप्यूटर में प्रवेश कर सकता था। Sasser के प्रसार से प्रमुख उद्देश्यों में से एक था संगठनों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के डेटा और संगठनात्मक नेटवर्कों को अस्थिर करना। इसके प्रभाव से निष्क्रिय होने वाले कंप्यूटरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और ऑनलाइन सेवाओं को प्रभावित किया गया।

वायरस के बचाव के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने बहुत जल्द सुरक्षा अपडेट जारी किए, जो वायरस के फैलाव को रोकने में मददगार साबित हुए। हालांकि, Sasser वायरस के बजाय सिस्टम में सुरक्षा गड़बड़ी की वजह से इसका प्रसार हुआ, जो कि उस समय की कमजोरी का दर्शाता था।

“Sasser Virus” के बाद क्या कदम उठाया गया?

“Sasser वायरस” के बाद, जो कि 2004 में एक वायरस के रूप में व्याप्त हुआ था, इसके बाद कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे ताकि ऐसी साइबर आक्रमणों के खिलाफ उचित सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

पहले, वायरस के प्रसार के कारण सिखाई गई सबसे बड़ी सबक यह थी कि सिस्टमों को सुरक्षित रखने के लिए नियमित रूप से सॉफ़्टवेयर अपडेट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उन लोगों को भी जागरूक किया गया कि अपडेट न करने से उनकी सिस्टम खतरे में हो सकती है।

दूसरे, साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए जागरूकता बढ़ाई गई। लोगों को इस बात की भी जानकारी दी गई कि वे कैसे फिशिंग अटैक और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ सावधान रह सकते हैं।

तीसरे, सिस्टम सुरक्षा में सुधार करने के लिए नई तकनीकी सुरक्षा सुविधाएँ विकसित की गईं, जिनमें वायरस स्कैन करने के लिए एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर और फायरवॉल जैसे उपकरण शामिल थे।

इन सभी कदमों ने साइबर सुरक्षा को मजबूत किया और लोगों को आगाह किया कि वे अपनी डिजिटल सुरक्षा की देखभाल करें। इस तरह, “Sasser वायरस” के बाद की चुनौतियों का सामना करने के लिए सामर्थ्य और उत्साह दोनों बढ़ाए गए।

Sasser Virus के खिलाफ कौन-कौन से देशों ने कदम उठाया?

Sasser वायरस, जो 2004 में उत्तरी यूरोप और एशिया के कई देशों में कंप्यूटर नेटवर्क्स पर हमला करने वाला था, ने एक वैश्विक साइबर हानि के रूप में प्रमुख उभारा था। इसका प्रमुख प्रभाव जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, और भारत जैसे देशों में देखा गया था।

जर्मनी में, Bundeskriminalamt (BKA) नामक संगठन ने वायरस के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और इसने कंप्यूटर नेटवर्क्स को प्रभावित किया था, जो सरकारी और निजी संगठनों को प्रभावित करता है। इसके बाद, फ्रांस और ब्रिटेन भी अपनी सुरक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा वायरस के प्रसार को रोकने के उपाय अपनाए।

जापान में, वायरस ने काफी हानि पहुंचाया और वहां की सरकार ने साइबर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कठोर कदम उठाए। भारत में भी, सरकार ने वायरस के प्रसार को रोकने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कार्रवाई की।

इन देशों ने साइबर हमलों के खिलाफ साझा संघर्ष करने के लिए विभिन्न सुरक्षा उपाय अपनाए, जैसे कि वायरस संदेशों की जांच करने, सुरक्षा को मजबूत करने, और साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई लेने में मदद की। इन देशों ने वैश्विक साइबर सुरक्षा में सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया और साइबर आशावादी समुदाय को सुरक्षित रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाई।

वर्तमान समय में “Sasser Virus” की क्या स्थिति है?

हालांकि, वर्तमान समय में “सासर वायरस” का प्राथमिक उपयोग काफी कम हो चुका है। विशेष रूप से इसका प्रभाव Windows XP और Windows 2000 के पुराने संस्करणों पर हुआ था, जो कि अब अधिकांश उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग नहीं किए जाते हैं।

वैश्विक साइबर सुरक्षा जागरूकता और सुरक्षा उत्पादों की सुधारी गई स्थिति ने इस तरह के पुराने वायरसों के प्रभाव को भी कम किया है। वर्तमान में, साइबर सुरक्षा कंपनियां और उपकरण वायरसों के खिलाफ अच्छी तरह से तैयार हैं और इस तरह के हमलों को रोकने के लिए उपाय करती हैं।

सासर वायरस के जैसे पुराने वायरसों की स्थिति नवीनतम सुरक्षा अपडेट्स के माध्यम से नियंत्रित की जा रही है, ताकि वे आगामी अवसरों में भी कमजोर और असार रहें।

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