URL क्या है? || Uniform Resource Locator

URL का पूरा नाम “Uniform Resource Locator” है। यह वेब पेज या अन्य इंटरनेटीय संसाधनों को पहचानने के लिए उपयोग किया जाता है। URL एक यूनिफ़ाइड रिसोर्स की स्थान और नाम स्थापित करता है ताकि उपयोगकर्ता इंटरनेट पर उस रिसोर्स को पहुँच सकें।

URL का एक साधारण ढंग इस प्रकार है: protocol://domain/path। यहाँ, “protocol” को वेब पर डेटा को संचालित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रोटोकॉल (जैसे HTTP, HTTPS) कहा जाता है, “domain” वेबसाइट का नाम होता है, और “path” उस वेबसाइट के अंदर किसी विशेष पेज या संसाधन का पथ होता है।

उदाहरण के लिए, “https://www.hinditechblog.com/page” एक URL हो सकता है, जो “https” प्रोटोकॉल का उपयोग करके “www.hinditechblog.com” डोमेन पर “page” पृष्ठ को पहुंचने की अनुमति देता है।

URL की पूरी रूपरेखा क्या है?

URL, या यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर, वेब पर एक विशिष्ट पता या पते को निर्दिष्ट करने के लिए एक प्रोटोकॉल होता है। यह इंटरनेट पर संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे कि वेबसाइट, फ़ाइल, या अन्य संसाधन।

एक URL की पूरी रूपरेखा में कई भाग होते हैं:

प्रोटोकॉल: URL का प्रारंभिक भाग प्रोटोकॉल को निर्दिष्ट करता है, जैसे HTTP, HTTPS, FTP, आदि।

डोमेन: डोमेन नाम यूआरएल के प्रमुख हिस्से को दर्शाता है और एक वेबसाइट की पहचान करता है। यह वेबसाइट का पता होता है।

सबडोमेन: यह वेबसाइट के डोमेन के नीचे स्थित होता है और विभिन्न खंडों को प्रतिनिधित करता है।

पथ: पथ वेबसाइट पर निर्दिष्ट संसाधन का स्थान दर्शाता है।

पैरामीटर: यह वेब पृष्ठ या संसाधन को और अधिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रयोग किया जाता है।

फ़्रैगमेंट: फ़्रैगमेंट URL के अंत में होता है और विशिष्ट संसाधन के भाग को निर्दिष्ट करता है।

एक पूर्ण URL इन सभी अंगों का उपयोग करते हुए एक संपूर्ण पता प्रदान करता है जो इंटरनेट पर संसाधन को पहुंचने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

URL के कितने प्रमुख भाग होते हैं?

URL (Uniform Resource Locator) को साधारित संसाधन स्थान निर्देशक कहा जाता है, जो वेब पर स्थानांतरण को सुनिश्चित करता है। एक URL कई प्रमुख भागों में विभाजित होता है जो संदर्भ, प्रोटोकॉल, डोमेन, सबडोमेन, पथ और पैरामीटर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रथम भाग प्रोटोकॉल को निर्दिष्ट करता है, जैसे HTTP, HTTPS, FTP इत्यादि। दूसरा भाग डोमेन को निर्दिष्ट करता है, जो वेबसाइट का पता होता है, जैसे www.hinditechblog.com।

तीसरा भाग उपयोगकर्ता को संदेश किस पृष्ठ को देखना है उसे बताता है, जैसे /page1/page2। चौथा भाग पैरामीटर्स को निर्दिष्ट करता है, जो अनुरोध के लिए अतिरिक्त जानकारी प्रदान करता है, जैसे ?id=123।

इस प्रकार, URL के मुख्य भागों को मिलाकर संदर्भ, प्रोटोकॉल, डोमेन, पथ, और पैरामीटर्स को प्रतिनिधित्व किया जाता है, जो वेब पृष्ठों और अन्य संसाधनों को वेब ब्राउज़र में दिखाने के लिए संदर्भित किया जाता है।

यूआरएल क्यों महत्वपूर्ण हैं इंटरनेट के लिए?

URL (Uniform Resource Locator) इंटरनेट के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह वेब पेजों, फ़ाइलों, या अन्य डिजिटल संसाधनों को खोजने और पहुंचने का माध्यम है। यूआरएल का उपयोग करके उपयोगकर्ता इंटरनेट पर जानकारी को आसानी से पहुंच सकते हैं।

यूआरएल की महत्वता इसलिए है क्योंकि यह इंटरनेट पर विभिन्न संसाधनों को अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ साझा करने की सुविधा प्रदान करता है। यह लिंक्स के माध्यम से एक से अधिक वेब पेज्स को एक साथ जोड़ने या संबोधित करने की अनुमति देता है।

विशेष रूप से, यूआरएल इंटरनेट के सर्वोत्तम उपयोगकर्ता अनुभव के लिए आवश्यक है। इसके माध्यम से, उपयोगकर्ता वेबसाइटों और डिजिटल सामग्रियों को त्वरित रूप से खोज सकते हैं, जिससे उन्हें समय और प्रयास की बचत होती है।

सम्पूर्णत: यूआरएल इंटरनेट की आधारशिला है जो उपयोगकर्ताओं को संचित जानकारी तक पहुंचने में मदद करता है। यह एक साधारण, सुगम और प्रभावी तरीके से विशेष डिजिटल संसाधनों तक पहुंचने का माध्यम है।

URL का उपयोग किसलिए किया जाता है?

यूआरएल का पूरा नाम “Uniform Resource Locator” है। यह इंटरनेट पर डेटा को खोजने और पहुंचने के लिए एक प्रमुख तकनीकी प्राधिकरण है। URL वेब पेज, फ़ाइलें, या अन्य इंटरनेट पर मौजूद विभिन्न संसाधनों को निर्दिष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाता है। जब आप वेब ब्राउज़र में किसी वेब पेज का यूआरएल दर्ज करते हैं, तो आपके ब्राउज़र कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से उस पेज को खोजता है और उसे आपके स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है।

URL का प्रमुख भागों में वेब प्रोटोकॉल (HTTP या HTTPS), डोमेन नाम (वेबसाइट का नाम), और डेटा संदर्भ (विशिष्ट पृष्ठ या फ़ाइल का पता) शामिल होते हैं। यह संदर्भ किसी विशिष्ट संसाधन तक पहुँचने की विधि बताता है।

उदाहरण के लिए, “https://www.hinditechblog.com/index.html” एक URL है जो “www.hinditechblog.com” नामक वेबसाइट के “index.html” पृष्ठ को दर्शाता है।

यूआरएल न केवल वेब पेजों तक पहुंचने का माध्यम है, बल्कि यह इंटरनेट पर अन्य संसाधनों जैसे फ़ाइलें, छवियाँ, वीडियो, आदि तक पहुंचने की भी दिशा प्रदान करता है।

यूआरएल का साझा अनुभाग क्या होता है?

URL का “साझा अनुभाग” उस भाग को कहते हैं जो वेब यूआरएल (URL) में इस तरह का अनुभाग होता है जिसमें जानकारी या पैरामीटर्स को डेटा के रूप में संदेश किया जाता है। यह अक्सर वेब ऐप्लिकेशन्स में डाइनामिक साइट को लोड करने, डेटा भेजने या पृष्ठों को पुनर्निर्मित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

इस अनुभाग में जानकारी को पैरामीटर्स के रूप में पाठ, संख्या या अन्य प्रकार के डेटा के रूप में शामिल किया जाता है। इसे वेब ऐप्लिकेशन्स के बीच डेटा संचार के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे कि वेब फॉर्म को सबमिट करते समय या डाइनामिक वेब पेज लोड करते समय।

उदाहरण के रूप में, एक वेब सर्वर को यह बताने के लिए कि किस पृष्ठ को लोड करना है, या कौन सा डेटा निर्दिष्ट किया जाना है, URL में साझा अनुभाग का उपयोग किया जाता है। यह वेब डेवलपमेंट में एक महत्वपूर्ण अंग है जो उपयोगकर्ता अनुभव को सुधारने और डेटा को संदर्भित करने में मदद करता है।

URL और URI में क्या अंतर है?

URL (Uniform Resource Locator) और URI (Uniform Resource Identifier) दोनों वेब पर संदर्भित रिसोर्स को निर्दिष्ट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं, लेकिन इन दोनों में थोड़ा अंतर है। URI एक सामान्य शब्द है जो किसी भी संदर्भ को निर्दिष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है, जबकि URL एक विशेष प्रकार का URI होता है जो वेब पर स्थित रिसोर्स की स्थानांतरण और पहुँच की जानकारी प्रदान करता है।

यूआरएल का उपयोग विशेष रूप से इंटरनेट पर रिसोर्सेज़ की स्थिति और योग्यता को प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जबकि URI का उपयोग किसी भी प्रकार के संदर्भ को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है, जिसमें इंटरनेट के अलावा भी शामिल हैं, जैसे कि फ़ाइल पथ।

इसके अलावा, URL का एक अनिवार्य भाग होता है प्रोटोकॉल (जैसे HTTP, HTTPS, FTP) जो रिसोर्स तक पहुंचने के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि URI में ऐसा कोई निर्दिष्ट अनिवार्य भाग नहीं होता है।

URL विशेषताएं क्या हैं?

URL का पूरा नाम “Uniform Resource Locator” है, और यह इंटरनेट पर संसाधित संसाधनों को पहचानने के लिए एक प्रमुख तकनीकी प्रारूप है। यूआरएल एक संदर्भ प्रणाली है जिसमें एक विशिष्ट संदेश, फ़ाइल, या संसाधन के पते को परिभाषित किया जाता है, जिससे उपयोगकर्ता इसे आसानी से खोज सकते हैं।

यूआरएल का मुख्य उपयोग वेब ब्राउज़र में वेब पेजों को खोलने के लिए होता है, लेकिन यह अन्य संसाधनों के भी पतों को संदर्भित कर सकता है, जैसे कि इमेजेज, वीडियो, डॉक्यूमेंट्स, और डेटाबेस।

URL में कई विशेषताएँ होती हैं, जैसे कि प्रोटोकॉल (http, https, ftp आदि), डोमेन (जिसमें साइट का पता होता है), पोर्ट (संदेश के लिए सेवा का पोर्ट नंबर), पथ (संदेश की निर्देशिका), और विशेष टेक्स्ट या पैरामीटर्स (कई बार सर्वर को संदेश का विशेष प्रकार या स्थान बताने के लिए)।

समर्थित URL फॉर्मेटों में सरल URL, मुख्य यूआरएल , और बाइनरी यूआरएल शामिल हैं, जो अलग-अलग उपयोग की सुविधा प्रदान करते हैं। URL ने इंटरनेट पर जानकारी को पहुंचने की प्रक्रिया को सुगम बनाया है और इसने वेब सर्विसेज़ और डिज़ाइन को अधिक सुलभ बनाया है।

यूआरएल के प्रकार क्या-क्या होते हैं?

URL (Uniform Resource Locator) वेब पर डिज़ाइन किया गया एक पता है जो इंटरनेट पर विभिन्न संसाधनों जैसे कि वेब पेज, इमेजेस, वीडियो, ऑडियो आदि को खोजने और पहुंचने का तरीका बताता है। URL का प्रमुख उपयोग वेब ब्राउज़र्स में वेबसाइट्स को पहुंचने के लिए होता है।

URL के कई प्रकार होते हैं जैसे:

  1. HTTP: यह हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल का उपयोग करता है और अधिकांश वेब पेज के लिए इस्तेमाल होता है।
  2. HTTPS: यह HTTP का सुरक्षित संस्करण है, जिसमें डेटा एन्क्रिप्शन किया जाता है।
  3. FTP: फ़ाइल ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल, जो फ़ाइल्स को इंटरनेट के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफ़र करने के लिए होता है।
  4. Mailto: इसका उपयोग ईमेल लिंक बनाने के लिए होता है।
  5. FTP: फ़ाइल ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल, जो फ़ाइल्स को इंटरनेट के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफ़र करने के लिए होता है।

ये कुछ प्रमुख URL के प्रकार हैं, जो वेब पर संसाधनों को पहुंचने का तरीका बताते हैं।

URL कैसे काम करते हैं?

URL (Uniform Resource Locator) इंटरनेट पर वेब पेज या अन्य संसाधनों को पहुंचने के लिए उपयोग किए जाने वाले पतों को दर्शाता है। यह एक प्रकार का अंतरनिर्दिष्टकरण प्रमाणित करता है जो इंटरनेट प्रोटोकॉल (साधारित रूप से HTTP या HTTPS) के साथ संबंधित होता है और स्थानीय और विदेशी नेटवर्क पतों का प्रबंधन करने के लिए उपयोग किया जाता है।

यूआरएल का विशेषता यह है कि यह विभिन्न भागों को संरचित रूप से वर्णित करता है: प्रोटोकॉल (जैसे HTTP, HTTPS), डोमेन नाम (जैसे www.hinditechblog.com), और संबंधित संसाधन का पूरा पता (जैसे /path/to/resource.html)।

यूआरएल द्वारा इंटरनेट पर डेटा का संदर्भ प्रदान किया जाता है, ताकि उपयोगकर्ता अपने वेब ब्राउज़र के माध्यम से इसे आसानी से एक्सेस कर सकें। यह एक प्रकार की पता बताता है जिससे सेवा या संसाधन तक पहुंचने के लिए उपयोगकर्ता को जरूरी जानकारी प्रदान की जाती है। इसका उपयोग वेब पेज, इमेज, वीडियो, डाउनलोड फ़ाइल आदि के लिए किया जाता है। यूआरएल की मदद से उपयोगकर्ता किसी भी वेब पेज या संसाधन तक सीधे पहुंच सकते हैं, जिससे वे इंटरनेट के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

URL का विस्तार कितना हो सकता है?

URL का विस्तार विशिष्टतः अनिवार्यता और प्रासंगिकता के आधार पर निर्धारित किया जाता है। URL, या यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर, वेब पेज या इंटरनेट पर किसी अन्य संसाधन के पते को निर्दिष्ट करता है। एक URL में कई प्रमुख अंग हो सकते हैं, जैसे कि प्रोटोकॉल (HTTP, HTTPS), डोमेन नाम, पोर्ट, पथ, और पैरामीटर्स।

एक URL का विस्तार बहुत ही विस्तृत हो सकता है, यदि वेबसाइट पर विस्तृत और हियरार्की भरे URL का उपयोग किया जाता है। विस्तार URL के प्रत्येक अंश का एक विशिष्ट मायने होता है और यह वेबसाइट के संरचना और उपयोग को समझने में मदद करता है।

लेकिन, एक URL का विस्तार 200 शब्दों तक बहुत ही असाधारण होगा। साधारणत: URL का विस्तार कुछ शब्दों में ही होता है, जो उसकी महत्ता को स्पष्ट करते हैं। इसलिए, URL को संक्षिप्त रूप में रखना अधिक उपयुक्त होता है।

URL की उपयोगिता क्या है?

URL (Uniform Resource Locator) इंटरनेट पर जानकारी तक पहुंचने का एक माध्यम है। यह वेब पेज, फ़ाइल, इमेज, वीडियो या किसी अन्य संसाधन को खोजने और पहुंचने की स्थिति को संदर्भित करता है। URL वेब ब्राउज़र द्वारा उपयोग किया जाता है ताकि यूज़र विशिष्ट वेब पेज या स्रोत की पहुंचता सकें।

यूआरएल का उपयोग होता है वेब पेज की संदर्भ स्थान को निर्दिष्ट करने के लिए। जब आप वेब ब्राउज़र में यूआरएल दर्ज करते हैं, तो आप उस वेब पेज पर जाते हैं जो URL में निर्दिष्ट किया गया होता है। यह इंटरनेट प्रोटोकॉल के एक हिस्सा है और वेब ब्राउज़र के माध्यम से स्थिति लोड करने के लिए उपयोग किया जाता है।

यह न केवल वेब पेज को पहुंचने में मदद करता है, बल्कि यह भी वेब पेज के नाम को ब्रांडिंग और पहचान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से लोग आसानी से वेब पेज को याद और शेयर कर सकते हैं।

URL को कैसे बनाया जाता है?

URL या यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर, इंटरनेट पर वेब पेज के पते को दर्शाने का एक तरीका है। URL को बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम होते हैं।

पहला कदम, सर्वर का चयन करना होता है, जो आपकी वेबसाइट को होस्ट करेगा। यह वेबसाइट के संचालन को संभालता है और उसके फ़ाइलों को संदर्भित करता है।

दूसरा कदम, यूनिक डोमेन नाम का चयन करना होता है। यह डोमेन नाम वेबसाइट का पहचानकर होता है और लोगों को आपकी वेबसाइट की पहुंच प्रदान करता है।

तीसरा कदम, पथ का चयन करना होता है। यह वह स्थान है जहां आपकी वेबसाइट पर कोई विशिष्ट पृष्ठ स्थित है।

आखिरी कदम, प्रोटोकॉल का चयन करना होता है, जो संचार के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे HTTP या HTTPS।

इन कदमों के बाद, एक URL तैयार हो जाता है, जो वेबसाइट की निश्चित पृष्ठ को उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंचने की सुविधा प्रदान करता है।

यूआरएल के सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं कौन-कौन सी हैं?

URL की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से पहली है प्रासंगिकता। यह यूआरएल वेब पेज के स्थान को निर्दिष्ट करता है और उपयुक्त सामग्री को प्रदान करता है। दूसरी विशेषता सुरक्षा है, जो URL के जरिए सुरक्षित डेटा सत्यापित करती है। वायरसों और मैलवेयर से सुरक्षित रहता है। तीसरी विशेषता सार्वजनिकता है, जो यूआरएल के माध्यम से सभी उपयोगकर्ताओं को विशेष सामग्री तक पहुँचने की अनुमति देती है।

चौथी विशेषता है संगतता, जो विभिन्न डिवाइसों और प्लेटफ़ॉर्मों पर समान रूप से काम करता है। यह URL का महत्व बढ़ाती है। पांचवां और अंतिम विशेषता है अनुकूलन, जो URL को अन्य वेब पृष्ठों और सामग्रियों के साथ एकीकृत करता है। यह उपयोगकर्ताओं को संदेशों और सामग्रियों के बीच संचार को सुगम बनाता है।

URL का विकास किसने किया था?

URL (Uniform Resource Locator) का विकास टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee) ने किया था। टिम बर्नर्स-ली एक ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक और इंटरनेट के निर्माता हैं, जिन्होंने 1990 में एनसीए और वर्ल्ड वाइड वेब के लिए पहला उपकरण बनाया। URL इस तकनीकी रचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे वेब यूज़र्स विभिन्न वेब पेजों और फ़ाइलों को खोज सकते हैं।

यूआरएल का पूरा रूप “Uniform Resource Locator” है और यह वेब पर रिसोर्सेज़ के पते को निर्दिष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक स्टैंडर्डीकृत तकनीकी प्रोटोकॉल है जो वेब ब्राउज़र्स का उपयोग करके वेब पेजों तक पहुँचने की अनुमति देता है।

टिम बर्नर्स-ली ने यूआरएल का विकास करके वेब के संचार माध्यम को अधिक प्रभावी बनाया और इंटरनेट को व्यापक रूप से पहुँचयोग्य बनाया। उनके योगदान ने वेब नेविगेशन को सरल और सुगम बनाया है, जिससे आधुनिक डिजिटल युग में हम सभी आसानी से इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं।

URL के अलावा क्या-क्या होता है इंटरनेट पतों में?

इंटरनेट पतों में URL के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। पहला है डोमेन नाम, जो वेबसाइट का पहचानकर्ता होता है। यह डोमेन नाम यूआरएल का मुख्य हिस्सा होता है जो उपयोगकर्ता को वेबसाइट के स्थान की जानकारी देता है। फिर, वेबसाइट के पते में विशेष प्रोटोकॉल (HTTP या HTTPS) होता है, जो डेटा को सुरक्षित रूप से ट्रांसमिट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

साथ ही, अन्य महत्वपूर्ण तत्व शामिल होते हैं, जैसे कि एक डायरेक्टोरी पथ, जो वेबसाइट की विभिन्न अनुभागों को सूचित करता है। इसके अलावा, वेबसाइट के पते में उपयोगकर्ता के लिए प्रयोगात्मक पूर्व-निर्धारित जानकारी भी होती है, जैसे कि विभिन्न वेब पृष्ठों के बीच का संबंध और वेबसाइट के संगठन की जानकारी। इसके रूप में, इंटरनेट पते वेबसाइटों के व्यावसायिक, सामाजिक, और तकनीकी संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

URL का प्रमुख उपयोग क्या है?

URL (Uniform Resource Locator) का प्रमुख उपयोग वेब पेज्स या वेब संसाधनों तक पहुंचने के लिए है। यह वेब ब्राउज़र में दर्शाया जाता है और उपयोगकर्ता को किसी निश्चित वेब पेज पर पहुंचने की संदेशात्मक या समर्थनात्मक गतिविधि प्रदान करता है।

यूआरएल में कई प्रमुख भाग होते हैं, जिनमें स्कीम (जैसे http, https), डोमेन (जैसे www.hinditechblog.com), पोर्ट (जैसे 80, 443), पथ (जैसे /path/to/page.html), और पैरामीटर्स (जैसे ?id=123) शामिल होते हैं।

यूआरएल उपयोगकर्ता को इंटरनेट पर विभिन्न संसाधनों का पता लगाने में मदद करता है, जैसे कि वेबसाइट, इमेज, वीडियो, फ़ाइलें, और अन्य संसाधन। इसके अलावा, यूआरएल विभिन्न इंटरनेटीय सेवाओं, जैसे कि डाउनलोड, अपलोड, डेटा स्ट्रीमिंग, और अन्य सेवाओं के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

सार्वजनिक उपयोग के साथ-साथ, यूआरएल का उपयोग विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान कार्यों में भी होता है, जैसे कि डाटा वेबसाइट क्रॉलिंग, डेटा एक्सट्रेक्शन, और डेटा विश्लेषण।

यूआरएल के इतिहास में कौन-कौन से महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं?

URL (Uniform Resource Locator) का इतिहास इंटरनेट के विकास के साथ ही गहराई से जुड़ा हुआ है। पहले, URLs केवल टेक्स्ट की रूपरेखा के रूप में उपयोग होते थे, लेकिन अब वे विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को दर्शाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है प्रोटोकॉल संख्या का उपयोग। प्रारंभ में, URLs HTTP (HyperText Transfer Protocol) का उपयोग करते थे, लेकिन अब HTTPS (HyperText Transfer Protocol Secure) का उपयोग होता है, जो डेटा की सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

दूसरा परिवर्तन रंगमंच का उपयोग है। पहले, URLs सिर्फ सादा टेक्स्ट के रूप में होते थे, लेकिन अब चित्रों, वीडियो और अन्य मीडिया प्रकारों को भी दिखाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।

तीसरा महत्वपूर्ण परिवर्तन मोबाइल यूआरएल्स का उपयोग है। अब, URLs को संवेदनशील ढंग से डिज़ाइन किया जाता है ताकि वे स्मार्टफोनों और अन्य मोबाइल डिवाइसेज़ पर सही रूप से दिखाई दे सकें।

आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी आप हमे कमेंट करके जरूर बताए।

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